मसूर की खेती


परिचय

मसूर रबी कीएक प्रमुख दलहनीफसल है। विश्वमें इसकी खेतीसर्वाधिक भारत मेंकी जाती है।उत्तर प्रदेश केबुन्देलखण्ड क्षेत्र में मसूरएकल फसल केरूप में उगायीजाती है। इसमेप्रोटीन प्रचुर मात्रा मेंपायी जाती है।

प्रजातियाँ

मसूर के खेतीके लिए कौनकौन सी प्रमुखप्रजातियाँ हैं?
मसूर की बुवाईकी जाने वालीप्रमुख प्रजातियाँ जैसे कीपूसा वैभव, आईपी एल८१, नरेन्द्रमसूर , पन्तमसूर , डीपी एल १५,के ७५ तथाआई पी एल४०६ इत्यादि प्रजातियाँहैं।

उपयुक्त भूमि

 मसूर कीखेती के लिएकिस प्रकार कीभूमि की आवश्यकताहोतीं है?
मसूर की  खेती के लिएदोमट भारी भूमिबहुत ही उपयुक्तहोती है इसकेलिए सबसे उत्तमदोमट भूमि होतीहै

उपयुक्त जलवायु

 मसूर कीखेती के लिएकिस प्रकार कीजलवायु की आवश्यकता  होतीहै?
फसल की वानस्पतिकवृद्धि के लिएठंडी जलवायु तथापकने के समयगर्म जलवायु कीआवश्यकता पड़ती है। फसलके लिए २०डिग्री से ३०डिग्री सेल्सियस तापमान कीआवश्यकता होती है।इस जलवायु मेंमसूर की खेतीसफलता पूर्वक कीजा सकती है

खेत की तैयारी

 मसूर कीखेती के लिएखेत की तयारीकिस प्रकार सेकरें?
मसूर की खेतीके लिए सबसेपहली जुताई मिट्टीपलटने वाले हलसे करना चाहिए।इसके पश्चात दोतीन जुताई देशीहल या कल्टीवेटरसे करने केपश्चात पाटा लगाकर खेत कोसमतल तैयार करकर लेना चाहिए।जिससे की सिचाईकरने में कोईअसुविधा हो।

बीज बुवाई

मसूर की समयसे बुवाई करनेके लिए ४०से ६० किलोग्रामबीज की मात्रातथा पछेती बुवाईके लिए ६५से ८० किलोग्रामबीज प्रति हैक्टरकी आवश्यकता होतीहै।
मसूर की खेतीके लिए बीजउपचार हमें हमेंकब और कैसेकरना चाहिए?
मसूर की फसलको रोगों सेबचाने के लिएबीज को बुवाईसे पूर्व ग्राम थीरम या ग्राम मैन्कोजेबप्रति किलोग्राम बीजको शोधित करकेतथा १० किलोग्रामबीज को २००ग्राम राइजोवियम कल्चरसे उपचारित करकेही बुवाई करनीचाहिए।   
मसूर की बीजके बुवाई कासही समय क्याहै और वहइसे कैसे करें?
मसूर की बुवाईअक्टूबर के मध्यसे नवम्बर केमध्य तक समयबहुत ही अच्छाहोता है। बुवाईके लिए जीरोटिलर सीड ड्रिललाभप्रद होती है।

जल प्रबंधन

मसूर की फसलमें सिचाई हमेंकब करनी चाहिए?   
मसूर की फसलएक सिचाई फूलआने के पूर्वएक सिचाई करनाअति आवश्यक होताहै। यदि जाड़ेमें वर्षा हो तो एकसिचाई फली बननेके समय करनाअति आवश्यक है

पोषण प्रबंधन

मसूर की खेतीमें उर्वरको काप्रयोग प्रति हैक्टर कितनीमात्रा में करें?
मसूर की सामान्यबुवाई के लिए२० किलोग्राम नाइट्रोजन, ६० किलोग्राम फास्फोरस, २० किलोग्राम पोटाशतथा २० किलोग्रामगन्धक प्रति हैक्टरकी दर सेप्रयोग करना चाहिए।

खरपतवार प्रबंधन

 मसूर कीफसल में खरपतवारोका नियत्रण करें?
मसूर की फसलके खरपतवार नियत्रणके लिए बुवाईके २० से२५ दिन बादनिराई गुड़ाई करनाचाहिए तथा पेंडामेथालिननामक रसायन की. लीटरकी मात्रा को१००० लीटर पानीमें मिलाकर बुवाईके बाद तुरन्तछिडकाव करना चाहिए।जिससे की खरपतवारउग ही सके।

रोग प्रबंधन

 मसूर कीफसल में प्रमुखरोग कौन कौनसे हैं, उसकानियंत्रण किस प्रकारसे करें?
मसूर की फसलके रोग जैसेकी उकठा रोग, गेरुई रोग, ग्रीवागलन, मूल गलनप्रमुख है। इसरोग से फसलको बचाने केलिए बुवाई सेपूर्व बीज कोथीरम नामक रसायन. ग्राममात्रा या ग्राम ट्राईकोडरमा सेप्रति किलोग्राम बीजदर से उपचारितकरके ही बुवाईकरनी चाहिए। फसलको मृदा जनितरोगों जैसे ग्रीवागलन मूल गलनआदि के बचावके लिए भूमिमें किलोट्राईकोडरमा पाउडर को गोबरकी खाद मेंमिलाकर मिट्टी में मिलादेनी चाहिए। जिससेकी रोगों काप्रकोप होसके।

कीट प्रबंधन

 मसूर कीफसल में लगनेवाले कीट कौनसे होते है, उसका नियंत्रण किसतरह से कियाजाए?
इस फसल मेंमुख्यता माहू कीटयह कीट फसलके पत्तियों तथापौधों के कोमलभागो से रसचूस कर नुकसानपहुचता हैं इसकीरोकथाम के लिएमैलाथियान 0 सी लीटरमात्रा या फारमेथियान२५ सीकी लीटरमात्र को ६००  से८०० लीटर पानीमें मिलाकर प्रतिहैक्टर की दरसे छिडकाव करनाचाहिए जिससे कीकितो का प्रकोप हो सकेदूसरा है फलीवेधक कीट यहकीट फालियो मेंछेद करके दानोको नष्ट करताहै, इसकी रोकथमके लिए फेनबलारेटनामक रसायन ७५०मिलीलीटर मात्रा या मोनोक्रोटोफासकी लीटरमात्रा को १०००लीटर की दरसे छिडकाव करनाचाहिए।

फसल कटाई

मसूर की फसलकी कटाई कासही समय क्याहै, और इसकेबीजो का भण्डारणकिस प्रकार करें?
मसूर की फसलको पूणर्तः पकनेके बाद हीकटाई करनी चाहिए, तथा फसल कोधुप में सुखाकरमड़ाई करके दानानिकल लेना चाहिए।मसूर को भण्डारणमें कीटों केबचानेके लिए एलुमिनियमफास्फाइडकी दो गोलीप्रति मीट्रिक टनकी दर सेप्रयोग करे। जिससेभण्डारण में होनेवाली कीटों कीहानि से मसूरको बचाया जासके।

पैदावार

मसूर की फसलसे प्रति हैक्टरकितनी उपज प्राप्तकी जा सकतीहै?

मसूर की फसलऔसतन उपज २०से २२ कुन्तलप्रति हैक्टर प्राप्तहोती है